अब मेरा मन घर जाना भाता नहीं | हृदयस्पर्शी जैन वैराग्य भजन | Jain Bhajan 2026।
Автор: जैनधर्म चक्र
Загружено: 2026-02-25
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अब मेरा मन घर जाना भाता नहीं ॥
इस हृदयस्पर्शी जैन वैराग्य भजन के साथ अपनी आत्मा की गहराई को छुएं। यह भजन एक आत्मा की उस पुकार को दर्शाता है जो संसार की नश्वरता और मोह-माया को समझकर अब केवल आत्म-कल्याण और मोक्ष की राह पर चलना चाहती है।
यह गीत हमें याद दिलाता है कि यह संसार एक 'सराय' (Temporary home) मात्र है, और हमारा असली घर तो वह है जहाँ जन्म और मरण के दुखों का अंत हो जाता है। जब वैराग्य जागता है, तो सांसारिक सुख फीके लगने लगते हैं और केवल परमात्मा का नाम ही सत्य प्रतीत होता है।
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