श्री कृष्ण ने सुदामा को दिए अपने विराट स्वरूप के दर्शन | श्री कृष्ण | दिव्य कथाएँ
Автор: Tilak
Загружено: 2026-03-18
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प्रेम को लेकर मुरली मनोहर के साथ तर्क-वितर्क करने के उपरांत सुदामा मन ही मन मुरली मनोहर की प्रशंसा करते हुए स्नान के लिए चले जाते है और स्नान करके वापस आने पर मुरली मनोहर के द्वारा दिए गए फूलों से खण्डहर में रखी एक प्राचीन श्री हरि की मूर्ति की पूजा करने लगते है। वही मुरली मनोहर अपनी पत्नी की याद में गीत गाने लगते है, जिससे पूजा कर रहे सुदामा का ध्यान भग्न होने लगता है और वह मुरली मनोहर से अपने साथ प्रभु की स्तुति करने के लिए आग्रह करता है। मुरली मनोहर ब्राह्मण सुदामा की बात टाल नहीं पाते है और वह सुदामा के साथ मिलकर प्रभु की स्तुति गाने लगते है। यह दृश्य देख रुक्मिणी भाव-विभोर हो जाती है, देवराज इंद्र, नारद सहित सभी देवी-देवता भी प्रकट होकर उनके साथ स्तुति का गायन करते है, यह दृश्य अति आनन्द प्रदान करने वाला होता है। सुदामा की भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण अपने विराट स्वरूप में सुदामा को दिव्य दर्शन प्रदान करते हुए कहते है कि उसके कई जन्मों की भक्ति आज सफल हो गई। वह सुदामा को दिव्य चच्छु प्रदान करते है, जिससे उसे भगवान श्री कृष्ण की स्तुति कर रहे सभी देवी-देवता दिखाई देने लगते है। श्री कृष्ण उन्हें यह भी बताते है कि उनके साथ खड़े मुरली मनोहर भी उन्हीं का स्वरूप है। जब वह अपने कर्म-फलों का भोग कर लेगा, उसके उपरांत उसे उनके चरणों में शाश्वत शांति प्राप्त हो जाएगी। तुम्हें अभी भी कर्म फल भोगना है, इसलिए मेरे अंतर्धान होते ही यह दृश्य और मिलन तुम भूल जाओगे। सुदामा श्री हरि की मूर्ति के चरणों में गिर कर फूट-फूट कर रोने लगता है और वह उठ कर मुरली मनोहर के स्तुति गायन की प्रशंसा करता है। समस्त दृश्य को देख रही रुक्मिणी भाव विह्वल हो जाती है।
संसार में यदि मनुष्य को कर्म के साथ धर्म के सही सामंजस्य को समझना हो तो इसके लिए श्रीमद् भगवत गीता से बड़ा ग्रंथ नहीं हो सकता। यह ग्रंथ दिव्य है इसीलिए विश्व में सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों को मानने वाले मनुष्य भी श्री मद् भगवत गीता और श्री कृष्ण के अनुयायी है। सनातन धर्म में श्री भगवान कृष्ण को सोलह कलाओं से पूर्ण अवतार माना गया है। मानव जीवन से जुड़े सभी प्रश्नो का उत्तर आपको श्रीकृष्ण के जीवन से मिल सकता है। श्री भगवत् गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद व उपदेशों का संकलन है। इन उपदेशों को आप अपने जीवन में समाहित कर परमात्मा से जुड़ सकते है। “तिलक” अपने संकलन “दिव्य कथाएं” के इस चरण में श्री कृष्ण से जुड़े प्रसंगों को आपके समक्ष प्रस्तुत करेगा। भक्ति भाव से इनका आनन्द लीजिये और तिलक से जुड़े रहिये।
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