इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूं। आचार्य प्रशांत। रामावतार त्यागी। हिंदी गीत। Warrior4climate
Автор: Warrior4climate
Загружено: 2026-01-11
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इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूँ... मत बुझाओ!
रामावतार त्यागी जी की अमर कविता को भावपूर्ण गीत के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ।
एक अकेला दिया जो अंधेरे में भी रोशनी बिखेरता है, आंसुओं से हंसी को जन्म देता है, और सभ्यता की आखिरी उम्मीद बनकर जलता रहता है...
यह गीत उन सभी कलाकारों, संघर्षशील आत्माओं और अकेले में भी उम्मीद की लौ जलाए रखने वालों के लिए है।
कवि: रामावतार त्यागी
Lyrics Snippet:
इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूँ, मत बुझाओ!
जब मिलेगी रोशनी मुझसे मिलेगी...
मैं न रोऊँ तो शिला कैसे गलेगी!
अगर यह गीत आपके दिल को छू जाए तो लाइक, कमेंट और सब्सक्राइब जरूर करें।
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