Swami Shivom Tirth Maharaj: Aarti Swami Vishnu Tirth Maharaj
Автор: Raman Bhati
Загружено: 2019-07-15
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जय जय विष्णुतीर्थ स्वामी, जय जय विष्णुतीर्थ स्वामी।
उज्जवल कीनी साधन विद्या, परम पूज्य ध्यानी।।
मंगल करने कारण जन का, कर उपकार जगत का।
ज्ञान ध्यान साधन प्रगटाया, करी कृपा स्वामी।।
महिमा तुमरी अपरंपारा, को जानत है जग में।
जानन की जो बात करत है, वह तो करत नादानी।।
करी चेतना अंतर जाग्रत, दीनन शिष्य जनो की।
वरदहस्त माथे सिर राखा, काढ़ा श्री स्वामी।।
अनत अखंड साधना कीनी, सत साहित्य प्रकाशा।
जन भक्तन तुमरो यश गावे, मुक्तकंठ स्वामी ।।
मात पिता गुरु धन्य तुम्हारे, धन्य हुआ परिवारा।
धन्य किया सब शिष्यवर्ग को, कृपवंत स्वामी।।
कृपा करो गुरुदेव हम पर, पड़े जगत विषयन ही।
दर्शन देओ अंतर माहीं, बने मुक्त स्वामी।।
करत विनय तव श्री चरणो में, तुम हो दीन दयाला।
दीन हीन हम शरण तिहारी, तुम हो अंतर्यामी।।
तीर्थ शिवोम खड़ा चरणो में, मस्तक दियो झुकाय।
पापी तापी पार उतारे, नज़र इधर स्वामी।।
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