श्रीगणेशमहिम्नः स्तोत्रम् | Ganesh Stotram
Автор: Bhajananandah
Загружено: 2026-02-28
Просмотров: 462
Описание:
वक्रतुण्डं वरं वन्दे
विश्ववन्द्यं विभावसम् ॥
विघ्नवृन्दविनाशार्थं
वन्दितं वन्द्यसत्तमैः ॥
मैं उस वक्रतुण्ड, श्रेष्ठ और समस्त जगत द्वारा वंदनीय प्रभु की वंदना करता हूँ, जो समस्त विघ्नों का नाश करने वाले हैं और श्रेष्ठ जनों द्वारा पूजित हैं।
गौरिसूनुं गुणनिधिं
गणनाथं गजाधिपम् ॥
गाम्भीर्यगिरिगम्भीरं
गीर्वाणगणपूजितम् ॥
मैं माता गौरी के पुत्र, गुणों के भंडार, गणों के स्वामी और देवताओं द्वारा पूजित, पर्वत के समान गंभीर स्वरूप वाले प्रभु को प्रणाम करता हूँ।
एकदन्तं इन्द्रनीलप्रभाकान्तिकरं प्रभुम् ॥
यस्य दन्तकिरणज्योतिः तमोऽन्धं ध्वंसयेद् ध्रुवम् ॥
एकदंत प्रभु, जिनकी दाँत की ज्योति इन्द्रनील मणि के समान तेजस्वी है, उनके प्रकाश से अज्ञानरूपी अंधकार निश्चित ही नष्ट हो जाता है।
लम्बोदरं लसत्सोमलेखालालितललाटकम् ॥
लीलया लोकलीलानां लीलाधारं निरञ्जनम् ॥
जिनके ललाट पर चन्द्र की कला शोभित है, जो सहज लीला से संसार का संचालन करते हैं और जो निष्कलंक एवं शुद्ध हैं उन लम्बोदर प्रभु को प्रणाम है।
मूषकाधिरूढमुग्रं
मुक्तामालाविभूषितम् ॥
मन्दराधरमन्दस्मितं
मोदकानन्दवर्धनम् ॥
जो मूषक पर आरूढ़ हैं, मुक्तामालाओं से विभूषित हैं, जिनका मंद-मंद हास्य मन को मोहित करता है और जो मोदक से भक्तों को आनंद देते हैं ऐसे प्रभु को नमन है।
सिद्धिबुद्धिसमालिङ्ग्य स्थितं शान्तं सनातनम् ॥
सकलसंसृतिसंतापशमनं शरणं मम ॥
जो सिद्धि और बुद्धि के साथ स्थित हैं, शाश्वत और शांत स्वरूप हैं, तथा संसार के समस्त संतापों को शांत करने वाले हैं — वे ही मेरे शरण हैं।
यस्य नाम्नः स्मृतिमात्रे
निर्भिद्यन्ते निरन्तरम् ॥
विघ्नवृक्षा विनश्यन्ति
वातवेगेन वज्रवत् ॥
जिनके नाम का केवल स्मरण करने मात्र से विघ्न रूपी वृक्ष वज्र के समान वेग से टूटकर नष्ट हो जाते हैं।
त्वमेव कारणं कार्यं
कर्ता कर्मफलप्रदः ॥
त्वमेव परब्रह्मासि
प्रकाशः परमेश्वर ॥
आप ही कारण हैं, आप ही कार्य हैं, आप ही कर्ता हैं और कर्मों का फल देने वाले हैं। आप ही परम प्रकाश और परम ब्रह्म स्वरूप हैं।
नागयज्ञोपवीताभं
नानारत्नविभूषितम् ॥
नमामि नाथं नित्यं त्वां
नादबिन्दुस्वरूपिणम् ॥
नाग के यज्ञोपवीत से सुशोभित, विविध रत्नों से अलंकृत, नाद और बिन्दु स्वरूप प्रभु को मैं नित्य प्रणाम करता हूँ।
करुणाकुलकल्लोलकदम्बकदलीवनम् ॥
कृपाकटाक्षकणिकाभिः कृतार्थीकुरु मां प्रभो ॥
हे प्रभु! आपकी करुणा समुद्र की तरंगों के समान है। अपनी कृपा-दृष्टि की एक छोटी सी किरण से ही मुझे कृतार्थ कर दीजिए।
विद्यावारिधिवेगाय
बुद्धिभास्करभासुर ॥
वित्तवृद्धिं यशोवृद्धिं देहि मे विघ्ननायक ॥
हे ज्ञान के समुद्र और बुद्धि के सूर्य समान तेजस्वी प्रभु! मुझे विद्या, बुद्धि, धन की वृद्धि और यश प्रदान कीजिए।
इदं स्तोत्रं सुधासारं
श्रद्धया यः पठेन्नरः ॥
तस्य चेतसि चिरं नित्यं
वसेः सिद्धिविनायक ॥
जो मनुष्य इस अमृत-सार समान स्तोत्र को श्रद्धा और भक्ति से पढ़ता है, उसके हृदय में आप सदैव निवास करते हैं, हे सिद्धिविनायक।
#bhajan #music #ganeshji #ganeshchaturthi #gajanandgeet #ganeshbhajan #kirtan #divinebhajans #lordganesha #lordganesh #sidhivinayak #powerfulvedicchantstyle #mantra #ganeshmantra
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: