दिल है कि मानता नहीं - एक रूहानी ग़ज़ल | Dil Hai Ki Manta Nahin (Ghazal Version) |
Автор: Ek Ghazal
Загружено: 2026-01-21
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"दिमाग ने मना किया, पर दिल आज भी ज़िद पर है..."
90 के दशक का वह अमर प्रेम गीत जिसे सुनकर आज भी रूह सुकून पाती है। हमने कोशिश की है "दिल है कि मानता नहीं" को एक नई रूहानी ग़ज़ल का रूप देने की। यह केवल एक गाना नहीं, बल्कि दिल की वह बेकरारी है जिसे लफ़्ज़ों में पिरोया गया है।
[गाने के बारे में]
इस वर्ज़न में आपको सादगी, ठहराव और एक रूहानी अहसास मिलेगा। अगर आप पुरानी यादों और सच्ची मुहब्बत के कायल हैं, तो यह ग़ज़ल सीधे आपके दिल के तार छेड़ देगी।
[Credits]
[Lyrics Snippet]
मुश्किल बड़ी है रस्म-ए-मुहब्बत, ये जानता नहीं...
ओ, दिल है कि मानता नहीं...
[Call to Action]
अगर यह रूहानी कोशिश आपके दिल तक पहुँची हो, तो कृपया Like करें और अपने उन दोस्तों के साथ Share करें जो पुरानी यादों को आज भी सीने से लगाए बैठे हैं। कमेंट में हमें ज़रूर बताएँ कि आपको यह ग़ज़ल कैसी लगी।
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