Operation eagle Claw, 1979 में जब अमेरिका ईरान में घुसा, और उल्टे पाँव भागना पड़ा अमेरिका को
Автор: THE VAYAVYA
Загружено: 2026-01-14
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#america
#iranprotests
भूमिका – रहस्य की शुरुआत
सोचिए ज़रा…
अगर दुनिया के सबसे ताक़तवर देश
अमेरिका के लोग
किसी दूसरे देश में फँस जाएँ…
और उन्हें बंदी बना लिया जाए…
⏸️
और अमेरिका के राष्ट्रपति
सब कुछ जानते हुए भी
उन्हें तुरंत बचा न पाएँ…
⏸️
आज की कहानी है
ईरान एम्बेसी होस्टेज संकट की,
जिसमें
52 अमेरिकी लोग 444 दिनों तक कैद रहे
और अमेरिका ने उन्हें बचाने के लिए
एक गुप्त सैन्य अभियान भी चलाया।
🎬 भाग 1 – ईरान की क्रांति और शाह की कहानी
साल था 1979।
ईरान में शासन करते थे एक राजा,
ईरान के आख़िरी शाह
जिनका नाम था — शाह मोहम्मद रज़ा पहलवी।
👉 जो अमेरिका के करीबी दोस्त माने जाते थे
लेकिन ईरान के बहुत से लोगों को लगता था कि:
शाह गरीब लोगों की बात नहीं सुनते हैं और
वे सिर्फ अमीरों और अमेरिका की मदद करते हैं
इसलिए ईरान में शुरू हुई
इस्लामिक क्रांति
इस क्रांति के नेता थे —
आयतुल्लाह खोमैनी,
जो एक मौलवी थे।
शाह ने उन्हें देश से निकाल दिया था,
लेकिन वे बाहर से कैसेट, भाषण और संदेश भेजते रहे 📼📢
उनका नारा था:
“शाह हटाओ, इस्लाम लाओ!”
धीरे-धीरे:
स्टूडेंट
मज़दूर
मस्जिद
बाज़ार वाले
सब उनके पीछे हो गए।
🔥 1978–79: ईरान जल उठा
देश भर में:
हड़ताल
प्रदर्शन
दंगे
पुलिस से झड़प
लाखों लोग सड़कों पर उतर आए।
सेना ने भी शाह का साथ छोड़ दिया… 😳✈️ शाह भाग गया
जनवरी 1979
शाह ईरान छोड़कर भाग गया।
और
फरवरी 1979
ख़ोमैनी वापस लौटे—
लाखों लोग स्वागत करने एयरपोर्ट पर थे 🎉
ईरान अब बदल चुका था।🎬 भाग 2 – शाह को अमेरिका ने क्यों जगह दी?
क्रांति के कुछ महीनों बाद ही
शाह बहुत बीमार पड़ गए।
अमेरिका ने कहा:
“हम उन्हें इलाज के लिए अपने देश आने देंगे।”
ईरान के क्रांतिकारी लोग भड़क गए।
उन्होंने कहा:
“अमेरिका हमारे दुश्मन को बचा रहा है!”
यहीं से
अमेरिका के खिलाफ गुस्सा
और ज़्यादा बढ़ गया।
🎬 भाग 3 – अमेरिकी दूतावास पर हमला
4 नवंबर 1979…
ईरान की राजधानी तेहरान में
अमेरिका का एक दूतावास था।
👉 दूतावास का मतलब:
एक ऐसी इमारत जहाँ किसी देश के लोग
दूसरे देश में काम करते हैं।
उस दिन:
ईरानी छात्रों और क्रांतिकारियों ने
दूतावास पर हमला कर दिया
उन्होंने:
गेट तोड़ दिए
काग़ज़ जला दिए
और अंदर मौजूद 52 अमेरिकी कर्मचारियों को पकड़ लिया
इन लोगों में थे:
राजनयिक (Diplomats)
दूतावास में काम करने वाले कर्मचारी
सभी को बंदी बना लिया गया।
🎬 भाग 4 – 444 दिनों की कैद
ये 52 अमेरिकी लोग
444 दिनों तक कैद में रहे।
इस दौरान:
उन्हें डराया जाता था
उनकी आँखों पर पट्टी बाँधी जाती थी
उन्हें अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था
उनके परिवार के लोग रोज़ टीवी पर खबरें देखते थे।
उस समय अमेरिका के राष्ट्रपति थे —
जिमी कार्टर।
👉 राष्ट्रपति का काम होता है:
देश की सुरक्षा देखना
अपने नागरिकों को बचाना
लेकिन:
बातचीत से बात नहीं बनी
ईरान झुकने को तैयार नहीं था
🎬 भाग 5 – राष्ट्रपति जिमी कार्टर का बड़ा फैसला
लगभग 6 महीने बाद
राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने फैसला लिया:
“अब सिर्फ बातचीत से काम नहीं चलेगा।”
उन्होंने सेना को आदेश दिया
कि एक गुप्त बचाव योजना बनाई जाए।
इस योजना का नाम रखा गया:
ऑपरेशन ईगल क्लॉ।
इस योजना में शामिल थे:
USS Nimitz
RH-53D Sea Stallion Helicopters
EC-130 Fuel Plane
🎬 भाग 6 – योजना क्या थी? (सरल शब्दों में)
इस योजना के मुख्य बिंदु थे:
1️⃣ रात में ईरान में प्रवेश करना
2️⃣ रेगिस्तान में उतरना
3️⃣ चुपचाप तेहरान शहर पहुँचना
4️⃣ बंदी लोगों को छुड़ाना
5️⃣ हेलिकॉप्टर से वापस लौट जाना
अगर यह योजना सफल होती,
तो अमेरिका की बहुत तारीफ होती।
लेकिन…
🎬 भाग 7 – रेगिस्तान में क्या गड़बड़ हुई?
जब 24 अप्रैल 1980 को RH-53D हेलिकॉप्टर USS Nimitz से उड़कर
ईरान के रेगिस्तान में पहुँचे…
तभी:
बहुत तेज़ रेत का तूफ़ान आ गया
हेलिकॉप्टर खराब होने लगे
कुछ मशीनें काम नहीं कर पाईं
फिर एक बहुत बड़ा हादसा हुआ।
गलती से एक RH-53D हेलीकॉप्टर अपने ही EC-130 Fuel Plane टकरा गया और बड़ा विस्फोट हुआ, जिससे EC-130 और हेलीकॉप्टर दोनों जल गए।
इस दुर्घटना में:
👉 8 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई
यह बहुत दुखद घटना थी।
🎬 भाग 8 – मिशन रद्द और अमेरिका की शर्मिंदगी
इस हादसे के बाद:
मिशन रोक दिया गया
सैनिकों को वापस बुला लिया गया
हेलिकॉप्टर
रेगिस्तान में ही छोड़ने पड़े।
पूरी दुनिया को पता चल गया कि:
“अमेरिका का गुप्त मिशन असफल हो गया है ।”
❓ दर्शकों के लिए सवाल
अगर आप राष्ट्रपति होते,
तो क्या आप:
A️⃣ सैनिकों को भेजते
या
B️⃣ सिर्फ बातचीत पर भरोसा करते?
कमेंट में लिखिए — A या B
🎬 भाग 9 – बंदी लोगों की रिहाई
राष्ट्रपति जिमी कार्टर को
इसका राजनीतिक नुकसान भी हुआ।
वो चुनाव हार जाते हैं
20 जनवरी 1981 को
अमेरिका के नए राष्ट्रपति बने —
रोनाल्ड रीगन।
उसी दिन:
ईरान ने
सभी 52 बंदी अमेरिकियों को रिहा कर दिया
वे सुरक्षित अपने देश लौट आए।
आज भी लोग बहस करते हैं:
क्या यह सिर्फ संयोग था?
या यह एक सोच-समझकर लिया गया फैसला?
🎬 अंत – इस कहानी से सीख
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि:
ताक़त हमेशा काम नहीं आती
सही समय और सही फैसला बहुत ज़रूरी होता है
और कभी-कभी
प्रकृति सबसे बड़ी ताक़त बन जाती है
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