SIGHING RUBRIC EXPLAINED BY DR M K SAHANI IN HINDI
Автор: Dr. Mridul Kumar Sahani
Загружено: 2026-02-02
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आह भरना कोई साधारण आदत नहीं, बल्कि रोगी की आत्मा की अवाचिक पुकार है। यह दीर्घकालिक भावनात्मक बोझ, असंतुलित वाइटल फोर्स और अव्यक्त पीड़ा का सूचक है। होम्योपैथी में इसका महत्व केवल एक लक्षण के रूप में नहीं, बल्कि सम्पूर्ण व्यक्तित्व की कुंजी के रूप में है।
आह को समझने वाला चिकित्सक केवल औषधि नहीं देता—वह रोगी के अंतर्मन को सुनता है, और वहीं से वास्तविक उपचार आरंभ होता है।
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