Terapath Ro Bhagya Vidhaata | Siriyari Ro Sant | Aacharya Shri Tulsi | Amit Singhi
Автор: Vardhman Music
Загружено: 2024-03-21
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Описание:
Terapath Ro Bhagya Vidhaata | Siriyari Ro Sant | Aacharya Shri Tulsi | Amit Singhi | Anup Jalota Cover Song
Song : Terapath Ro Bhagya Vidhaata / Siriyari Ro Sant
Lyrics : Ganadhipati Gurudev Shri Tulsi
Singer : Amit Singhi
Music / Mixing : Gautam Singhi
Lyrics:
तेरापथ रो भाग्य विधाता,
श्रमण संघ रो सक्षम त्राता,
लाखां आंखड़ल्यां रो तारो हार हिया रो लागै ।
म्हांनै सिरियारी रो संत प्यारो - प्यारो लागै ।
सत्य सिराणै सदा राखतो त्यागी सारी सुविधावां,
जिनवाणी पर जीवन जामा झोंक्या, बलिहारी जावां ।
बणी साधना सिद्धि स्वयं ही, चीर चल्यो सब बाधावां,
आत्म - समर रै अमर वीर री म्है गौरव गाथा गावां ।
पावां सुमिरण स्यूं सुखसाता,
बण ज्यावां हां ताजा माता,
दाता ज्ञान चक्षु रो, सूरज - सो उणियारो लागै ।
त्याग तपोबल प्रबल मनोबल चकित चकित मानव रहग्या,
खड्या हुया अवरोध जिता ही अपणै आप सभी ढहग्या ।
प्रतिस्त्रोत में बढ्यो, भले ही अनुस्त्रोत में सब बहग्या,
पुण्य पोरसो तेज भोर-सो, घोर विरोधी भी कहग्या
मन संकल्प - शक्ति ही भारी,
धार्मिक जन जुग जुग आभारी,
मावस रात में बो पूनम सो उजारो लागे ।
पंथ चलाणो लक्ष्य नहीं हो, चल्या चरण बस पंथ बण्यो,
कुण जाणै किण पल में दीपां मां अलबेलो पुत्र जण्यो ।
बचपन स्यूं बूढापै तांई रह्यो सुरंगो बण्यो ठण्यो,
ढिगला - ढिगला रतन निकाल्या, नहीं निरर्थक प्हाड़ खण्यो।
शासन में अनुशासन थाप्यो,
मानदण्ड स्यूं जाय न माप्यो,
व्याप्यो जन - जन रै मन मन में मोहनगारो लागे।
बिन बैराग भेष साधु रो भार गधे पर हाथी रो,
काच मिणकलो कठै, कठै बो अणमोलो संयम हीरो ।
बडै घराणै रो चाहे वैधव्य सरावै कुण कीं रो,
समझदार समझै है खोटै सिक्कै री कीमत जीरो ।
आ है सांवरियै री वाणी,
अनुभव रै छकणै स्युं छाणी ।
कानां घणी सुहाणी झालर सो झणकारो लागै ।
संविधान जद गढ्यो, बढ्यो जस, हुई बगावत भी सागै,
घबराहट रो काम नहीं, चढ़ चल्यो स्वयं नाजुक धागै ।
चंदो वीरो, चंदू वीरा फत्तू च्यारां रै ठागै,
भेळो आ'र नहीं थारै म्हारै जो पैर धर्यो आगै ।
रुकग्या चरण सतजुगीजी रा,
सुणता रैग्या संत सधीरा,
आंखे झांखे बाबलिये रो काम करारो लागै ।
तू कद दीक्षा लेसी ? जब तक जिवै मेरण्यां मगरै री,
दुलहिन रौवे न्याय दूल्हो रोवै कुण सी दुविधा हेरी ।
सुण्यां बात संजम री ताव चढै तब दीक्षा में देरी,
एक मर्या दोन्यां नै लेणी पड़सी अणसण री सेरी ।
इण विध कर कर कड़ी कसौटी,
चुपकै खींची सब री चोटी,
ज्यू - त्यू मूंडणो बाबै नै जैर खारो लागै ।
आज्ञा धर्म अनाज्ञा अधरम चल्यो सफल अभियान जो,
सही समझ दी धार्मिक जग नै ओ मोटो अवदान जो ।
जाग्रत जीवन जीयो राखी सम्मुख साध्य महान जो,
प्राप्त अतीन्द्रिय ज्ञान, अपूरब साहस रो संधान जो ।
इच्छा मृत्यु वरी ज्योतिर्धर,
पद्मासन में समता निर्झर
स्वामी भवसागर रो जाणक लियो किनारो लागै ।
संवत दो हजार उणचाली सन् बंय्यासी खास है,
वर्षां स्यूं आश्वासित पायो राणावास प्रवास है।
नव - निर्वाचित आया राष्ट्रध्यक्ष स्वयं सोल्लास है,
निर्वाणोत्सव रो ज्ञानीजी गढ्यो अजब इतिहास है।
मेहरा राज्यपाल रस पावै, माथुर मुदित मुदित गुण गावै,
जनता सरिता में न समावै,
कांठै री कलियां खिल ज्यावै,
गगन धरा गुंजावै जय भिक्षु रो नारो लागै ।
चंदन बैद वित्त मंत्री, शिक्षा मंत्री विख्यात है,
श्रावक - निष्ठा - पत्र पढ्यो आ नई हुई शुरूआत है।
दीक्षा- सीन नवीन निहारो म्हारो यातायात है,
आस्थामय उपवास हजारां सारो संघ सनाथ है ।
हेम - मातृभूमि सिरियारी,
भिक्षु - तपोभूमि सिरियारी,
अंतिम अनशन स्थल सिरियारी,
स्वाम - समाधिस्थल सिरियारी,
श्रद्धानत ठाकुर सिरियारी
'तुलसी' सिरियारी रो निरखण जिस्यो निजारो लागै ।
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