Jagannath Stuti | जगन्नाथ स्तुति | Rath Yatra 2025
Автор: vedic mantra
Загружено: 2025-06-25
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जगन्नाथ स्तुति में "नीलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्रसुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः" यह पंक्ति प्रमुख है। इसका अर्थ है "हे नीलांचल में निवास करने वाले, नित्य, परमात्मा, बलभद्र और सुभद्रा के साथ जगन्नाथ, आपको नमस्कार है।"
जगन्नाथ स्तुति के कुछ मुख्य अंश इस प्रकार हैं:
नीलाचल निवासाय:
यह पंक्ति भगवान जगन्नाथ के निवास स्थान, नीलाचल (पुरी) का उल्लेख करती है।
नित्याय परमात्मने:
इसका अर्थ है "हे नित्य, परमात्मा"।
बलभद्रसुभद्राभ्यां:
यह पंक्ति भगवान जगन्नाथ के साथ उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा का उल्लेख करती है।
जगन्नाथाय ते नमः:
यह पंक्ति जगन्नाथ को नमस्कार करने का भाव व्यक्त करती है।
जगदानंदकंदाय प्रणतार्तहराय च:
इसका अर्थ है "हे जग के आनंद के दाता, भक्तों के दुखों को दूर करने वाले"।
श्री जगन्नाथ प्रार्थना:
यह एक प्रार्थना है जिसमें भक्त अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करते हैं और भगवान से कृपा की याचना करते हैं
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