मायके वालों की याद आई😞||ससुराल में मेरा पहला त्योहार😍|| घुघुतिया त्यौहार||
Автор: DEEPALI RAUTELA NAYAL
Загружено: 2026-01-17
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घुघुतिया त्योहार 15 जनवरी को मनाया जाएगा. लेकिन त्योहार से एक दिन पहले आटा, तेल, सूजी, दूध, घी और गुड़ के पानी से घुघुती पकवान बनाने की परंपरा है. घुघुतिया त्योहार कुमाऊं मंडल का प्रमुख त्योहार माना जाता है. घुघुतिया त्यौहार कुमाऊं का लोक पर्व के नाम से जाना जाता है..
कुमाऊं के शासक कल्याण चंद (जिन्हें कल्याण शाह के नाम से भी जाना जाता है) को सूखे का सामना करना पड़ा था। कथाओं के अनुसार, उन्होंने देवी श्यामला से प्रार्थना की, जिन्होंने उन्हें प्रसाद के रूप में गुघुतिया मिठाई बनाने का निर्देश दिया। मकर संक्रांति के अवसर पर यह मिठाई अर्पित की गई, जिसके बाद सूखा समाप्त हो गया। घुघुतिया या मकर संक्रांति के अगले दिन बच्चे काले कौआ घुघुती माला खाले की आवाज लगाकर कौए को बुलाते हैं और उसे यह पकवान खिलाते हैं
घुघती एक प्रकार की जंगली कबूतर जैसी दिखने वाली पक्षी है। इसका स्वर "घुघू-घुघू" बहुत मधुर होता है — इसी वजह से इसे घुघती कहा गया। यह पहाड़ी क्षेत्रों के गांवों, खेतों और वनों में सामान्यतः दिखाई देती थी।
उत्तराखंड के कुमाऊं का घुघुटी महोत्सव: इस त्योहार को उत्साह और उमंग के साथ मनाने के लिए, स्थानीय लोग मीठे आटे और गुड़ से घुघुटे नामक तली हुई मिठाइयाँ तैयार करते हैं, जिन्हें ढोल, अनार, चाकू और तलवार के आकार में बनाया जाता है ।
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