परिंदे क़फ़स से निकलने लगे… 🕊️ | आज़ादी और हौसले पर ग़ज़ल
Автор: GHAZAL KA SAFAR
Загружено: 2026-02-14
Просмотров: 16
Описание:
परिंदे क़फ़स से निकलने लगे… 🕊️ | आज़ादी और हौसले पर ग़ज़ल
यह ग़ज़ल उन लोगों के नाम है
जो बंदिशों में रहे,
मगर टूटे नहीं।
“परिंदे क़फ़स से निकलने लगे,
तो आसमान भी झुकने लगे…”
हर अंधेरे के बाद एक सुबह होती है,
और हर कैद के बाद एक उड़ान।
अगर यह कलाम आपको हौसला दे
तो वीडियो को लाइक और शेयर ज़रूर करें।
अपनी राय कमेंट में लिखें।
#परिंदे #क़फ़स #आज़ादी #हौसला #प्रेरणादायकशायरी #हिंदीग़ज़ल #उम्मीद #दिलछूलेनेवाली #Poetry #Motivation
Повторяем попытку...
Доступные форматы для скачивания:
Скачать видео
-
Информация по загрузке: