ये देवी शक्ति सदैव देती हैं विपत्तियों में तत्काल मार्ग, नवरात्र में करें कृपा सिद्धि।
Автор: गृहस्थ तंत्र
Загружено: 2026-03-15
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काशी क्षेत्र की प्रमुख महायोगिनी भगवती चौसठ्ठी देवी। चौंसठ योगिनी कृपा की सरल विधि।।
चैत्र नवरात्र अनुष्ठान।
चैत्र वासंतिक नवरात्र अनुष्ठानम्
नवरात्र व्रत अनुष्ठान की महिमा अनंत है। कलिकाल में अश्वमेध यज्ञ समान पुण्य प्राप्ति होती है नवरात्र महापूजन से। जिस महा अनुष्ठान में कलश स्थापन, वृहद मंडल पूजन, नित्य अभिषेक, वृहद मंत्र पाठ /आवृत्ति, यज्ञ - होम व बलि आदि विधान होते हैं उन्हें महापूजा कहा जाता है और इस महापूजा के फल को अक्षरों में सीमित नहीं किया जा सकता। प्रत्येक सनातनी स्त्री पुरुष को वर्ष के दोनों प्रमुख प्रकट नवरात्र अवश्य करना चाहिए। इससे महामाया प्रसन्नता से वह सब प्रदान करतीं हैं जिसमे विषय में मनुष्य सोच तक नहीं सकता।
गृहस्थ तंत्र संस्थान द्वारा इस बार भगवती के दो विशेष शक्ति पीठ में अति विशिष्ट प्रथम बार ऐसा आयोजन हो रहा है जिसमें निकुंभला नवचंडी, जयदुर्गा नवचंडी, कामाख्या नवचंडी, महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती तीनों महाशक्तियों का पृथक पृथक नवचंडी और भगवती विंध्यवासिनी महादुर्गा का शतचंडी इतना कुछ आयोजित होगा जिसकी तैयारी आरंभ कर दी गयी है। जगदंबा की कृपा प्रसाद से ऐसे साधकों का आगमन भगवती विंध्यवासिनी कृपा करुणा कर के करवाती हैं जो संस्थान के साथ मिलकर दिव्य अनुष्ठान करने हेतु प्रतिबद्ध हो जाते हैं तथा हम सभी के हित की अनन्य कामना करते हैं।
निम्न अलग अलग विकल्प हैं जिसमें आप अपनी सुविधानुसार संकल्प हेतु विवरण प्रदान कर सकते हैं।
1. नवरात्र कलश व चंडी पाठ - इसमें 108 संपूर्ण कलश में आपका नाम संकल्पित रहेगा तथा नवरात्र पुजन। अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा।
2. कलश सहित नवचंडी संपुट - नौ दिनों तक होने वाले संपुट नवचंडी तथा कलश स्थापन पूजन। अनुष्ठान उपरांत प्रसाद आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा।
3. अखंड ज्योत, कलश तथा नवचंडी - भगवती के नौ दिन संपुट नवचंडी पाठ सहित कलश व अखंड ज्योत में संकल्प। अनुष्ठान उपरांत अष्टमातृका प्रसाद व देवी कवच (ताम्र) आपको अगले 15 दिनों में भेजा जायेगा
4. शतचंडी विशेष - नौ दिनों में पूर्ण होने वाला शतचंडी महायज्ञ संपूर्ण नवरात्र पूजन । अनुष्ठान उपरांत श्री दुर्गा सप्तशती ताम्र यंत्र, देवी रक्षा कवच व प्रसाद आपको भेजा जायेगा।
5. संपूर्ण नवरात्र विशेष - चैत्र नवरात्र में आयोजित श्री निकुंभला नवचंडी - रक्षा हेतु व शत्रु तथा कतिपय अभिचार के नाश हेतु, जयदुर्गा नवचंडी - विजय व संपूर्ण रक्षा हेतु, कामाख्या नवचंडी - समस्त धर्मयुक्त कामनाओं की पूर्ति हेतु, व तीनों महाशक्तियों की नवचंडी सहित भगवती विंध्यवासिनी का शतचंडी यह सब इसमें सम्मिलित है तथा अन्य तारा चंडी पूजन तंत्रोक्त याग, चौंसठ योगिनी विशेष याग आदि सब कुछ पूर्ण सम्मिलित है।
अनुष्ठान उपरांत आपको 1. प्रसाद 2. भगवती को अर्पित वस्त्र 3. देवी यंत्र ताम्र निर्मित व चंडी अभिमंत्रित 4. स्फटिक तथा महालक्ष्मी रुद्राक्ष की माला - महालक्ष्मी व कामाख्या नवचंडी अभिमंत्रण युक्त विशेष - धनलाभ व कामनाओं की पूर्ति सहित वज्र रक्षण हेतु 5. योगिनी विशेष कवच तथा यजमान के नाम से अभिमंत्रण सहित एक विशेष महारक्षा कवच (यह अपने आप में अति विशिष्ट है प्रथम बार हम सभी के द्वारा नवरात्र में निर्मित होगा) यह सब पूर्णिमा उपरांत आपको भेजा जाएगा।
नित्य पूजन में गुरु दक्षिणामूर्ति मंडल पूजन, चौंसठ योगिनी मंडल पूजन , सर्वतोभद्रमंडल पूजन, क्षेत्रपाल लोकपाल मंडल पूजन, नवग्रह मंडल पूजन, अतिरुद्र मंडल पूजन सहित जिनका भी नवचंडी होगा उनका मंडल पूजन विशेष होगा। साथ ही एक विषय जो और भी विशेष है भगवती उग्रतारा का नवरात्र होने के कारण तारा नवमी/रामनवमी का विशेष तंत्रोक्त पूजन। इस बार ताम्र व रजत दोनों के रक्षात्मक कवच विशेष निर्मित किये जा रहें जो देखने में भी आकर्षक रहेंगे उनका विशेष अभिषेक अभिमंत्रण व जागरण की समस्त विधि सहित बलि आदि सब कुछ विशेष मुहूर्त अनुसार नवरात्र में ही पूर्ण कर लिया जायेगा। जो आप अनुष्ठान सहित या पृथक स्वतंत्र भी वह ले सकेंगे।
रौद्र नामक संवत्सर का यह चैत्र नवरात्र इस बार हम सभी के लिए विशेष है क्योंकि देवी पीठ पर प्रथम बार इतनी वृहद मात्रा में भगवती स्वरूपों का क्रमगत पूजन हम सभी के रक्षण कल्याण व धन धान्य की वृद्धि हेतु होगा।
विशेष - अनुष्ठान की विशेषता क्या है, महिमा क्या है, परिणाम क्या होगा यह सब वृहद रुप से टेलिग्राम पर लिखा मिलेगा तथा अनुष्ठान उपरांत सामग्री क्या जाना है वह सब यहां व बेवसाइट पर रहेगा, बेवसाइट पर वृहद लिखना संभव नहीं है अतः यहां लिखा गया है। इस बार भगवती कृपा से जो दिव्य छह अलग अलग नवचंडी सहित अलग से शतचंडी हो रहा उसके कारण अनुष्ठान में उपस्थित कवच माला आदि की विशेष प्रभाव रहेगा। जहां हर बार एक ही महाशक्ति के 64 योगिनियों का पूजन होता था इस बार 7 हो रहा है। गृहस्थ तंत्र के हर अनुष्ठान का अलग व दिव्य महत्ता भगवती कृपा व दया कर पूर्ण करवातीं हैं। अतः इन दिव्य कवच मालाओं का अपने पूजन स्थान पर संरक्षण स्थापन करें व आवश्यकता पड़ने पर ही धारण आदि करें जो की गृहस्थ के अनुकुल संपूर्ण विधि से निर्मित होता है यहां तक की स्वर्णकार आदि भी देवी कृपा से श्रीकुल दीक्षित अथवा शैव शाक्त मिलते हैं तभी यह सब निर्मित होता है अन्यथा सब कवच फिर सामान्य रजत खोल में ही जाते हैं। जब विशेष साधक अनुष्ठान हेतु व स्वर्णकार आदि मिल जाते हैं तो उसका लाभ आपके समक्ष प्रस्तुत रहता है ताकी हमारे कल्याण में कोई कमी ना हो।
आप इन अनुष्ठानों हेतु https://www.grihasthtantra.com पर पधारकर विवरण प्रदान कर सकते हैं।
यतो नंदजा ततो जयः 🙏
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