माघ
Загружено: 2026-01-13
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यह चित्तौड़गढ़ के इतिहास में दर्ज होने वाला एक अत्यंत भव्य और गौरवशाली आयोजन रहा। भगवान देवनारायण जी के जन्मोत्सव (माघ सप्तमी) पर गुर्जर समाज द्वारा निकाली गई यह रथ यात्रा आस्था, उत्साह और सांस्कृतिक एकता का बेजोड़ संगम थी।
आपके द्वारा बताए गए विवरणों के आधार पर तैयार एक विस्तृत लेख यहाँ प्रस्तुत है:
चित्तौड़गढ़ में भगवान देवनारायण जन्मोत्सव की धूम: भक्ति और शौर्य के संगम में उमड़ा जनसैलाब
चित्तौड़गढ़ (मेवाड़ प्रांत):
मेवाड़ की वीर धरा चित्तौड़गढ़ में भगवान श्री देवनारायण जी के जन्मोत्सव 'माघ सप्तमी' के अवसर पर गुर्जर समाज द्वारा एक ऐतिहासिक और भव्य रथ यात्रा निकाली गई। गोरा बादल स्टेडियम से प्रारंभ होकर नीला खुरा देवरा तक जाने वाली इस यात्रा ने पूरे शहर को केसरिया रंग और भक्ति के उल्लास में सराबोर कर दिया।
1. आस्था और राजनीति का संगम
इस भव्य आयोजन में समाज की एकजुटता देखते ही बनती थी। कार्यक्रम में 10,000 से अधिक युवा, युवतियों और समाज के पंच-पटेलों ने शिरकत की। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र के दिग्गज, पूर्व मंत्री धीरज गुर्जर तथा मांडल विधायक उदयलाल भड़ाणा की मौजूदगी ने इस उत्सव के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। विभिन्न देवरों से आए भोपाजी और हजूरिया जी के सानिध्य ने यात्रा में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया।
2. उज्जैन की कला और पंजाब का जोश
यात्रा का मुख्य आकर्षण देश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकार थे। पंजाब के ढोल वादकों की गूँजती थाप पर जहाँ युवा थिरक रहे थे, वहीं उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत सजीव झांकियों ने सबका मन मोह लिया। विशेष रूप से भगवान शिव का रूप धरे कलाकार और माँ दुर्गा का रौद्र व ममतामयी स्वरूप धारण किए कलाकारों की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इन झांकियों ने ऐसा माहौल बना दिया मानो साक्षात देवलोक चित्तौड़गढ़ की गलियों में उतर आया हो।
3. जीवंत हुआ बगड़ावत इतिहास
हंसराज अठारिया द्वारा भगवान देवनारायण जी की मनमोहक झांकी के साथ-साथ 24 घोड़ों पर सवार 24 बगड़ावत भाइयों की झांकी ने गुर्जर समाज के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया। शौर्य और पराक्रम का यह प्रदर्शन देख हर कोई नतमस्तक हो गया।
4. महिलाओं का नृत्य और युवाओं का उत्साह
समाज की महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में लोक गीतों पर नृत्य कर यात्रा की शोभा बढ़ाई। वहीं, दूसरी ओर आधुनिक DJ की धुनों पर गुर्जर समाज के युवाओं ने पूरे जोश के साथ नृत्य किया। भक्ति और आधुनिक उत्साह का यह मेल यात्रा को और भी जीवंत बना रहा था।
5. पुष्प वर्षा और भव्य स्वागत
गोरा बादल स्टेडियम से लेकर नीला खुरा देवरा तक के पूरे मार्ग को तोरण द्वारों और झंडों से सजाया गया था। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर रथ यात्रा का स्वागत किया गया। समाज के बुजुर्गों और पंच-पटेलों का सम्मान इस यात्रा की परंपरा और मर्यादा को दर्शा रहा था।
यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि गुर्जर समाज की अपनी संस्कृति और आराध्य देव के प्रति अटूट श्रद्धा का प्रदर्शन था। नीला खुरा देवरा पहुँचने पर भगवान देवनारायण की महाआरती के साथ इस भव्य आयोजन का समापन हुआ।
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