अच्छे और बुरे कर्मों का कोई फल या परिणाम नहीं होता।
Автор: Understanding Buddha's Teachings
Загружено: 2026-02-18
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यह वाक्य मिच्छा-दृष्टि (गलत दृष्टिकोण) का एक उदाहरण है।
इसका मतलब है कि व्यक्ति यह मानता है कि:
अच्छे कर्म करने से कोई शुभ फल नहीं मिलता
बुरे कर्म करने से कोई दुःखद परिणाम नहीं होता
कर्म और उसके परिणाम (कम्म-विपाक) का कोई नियम नहीं है
लेकिन बुद्ध की शिक्षा के अनुसार:
सुकत (सुकृत कर्म) → शुभ फल देता है
दुक्कट (दुष्कृत कर्म) → अशुभ फल देता है
हर कर्म का परिणाम होता है — मानसिक, नैतिक और अस्तित्वगत स्तर पर
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