सांसारिक और संत के कर्म में क्या अंतर है?
Автор: Samarthguru
Загружено: 2026-02-21
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बाहर से देखें तो संत भी कर्म करते हैं
और एक सामान्य व्यक्ति भी कर्म करता है।
दोनों चलते हैं, बोलते हैं, कार्य करते हैं।
लेकिन फिर भी दोनों के कर्म में गहरा अंतर होता है।
सांसारिक व्यक्ति का कर्म
अहंकार, इच्छा और फल की अपेक्षा से जुड़ा होता है।
वह “मैं कर रहा हूँ” के भाव से कार्य करता है।
जबकि संत का कर्म
कर्तापन से मुक्त होता है।
वह कर्म तो करता है,
लेकिन भीतर कोई दावा नहीं करता।
इस वीडियो में हम समझेंगे—
• कर्म और कर्तापन में अंतर
• इच्छा-प्रेरित कर्म क्या है
• संत का कर्म क्यों बंधन नहीं बनता
• क्या गृहस्थ रहते हुए भी संत भाव संभव है
• कर्म करते हुए मुक्त कैसे रहें
जब कर्ता मिट जाता है,
तभी कर्म मुक्त हो जाता है।
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