मेरे बेटे बिजली की तरह कभी मत गिरना : केदारनाथ सिंह स्वर: नितिन डेविड हिन्दी कविता Hindi Kavita
Автор: Punervasu Diaries
Загружено: 2022-12-19
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Описание:
मेरे बेटे बिजली की तरह कभी मत गिरना
मेरे बेटे
कुँए में कभी मत झाँकना
जाना
पर उस ओर कभी मत जाना
जिधर उड़े जा रहें हों
काले-काले कौए
हरा पत्ता
कभी मत तोड़ना
और अगर तोड़ना तो ऐसे
कि पेड़ को जरा भी
न हो पीड़ा
रात को रोटी जब भी तोड़ना
तो पहले सिर झुकाकर
गेहूँ के पौधे को याद कर लेना
अगर कभी लाल चींटियाँ
दिखाई पड़ें
तो समझना
आँधी आने वाली है
अगर कई-कई रातों तक
कभी सुनाई न पड़े स्यारों की आवाज
तो जान लेना
बुरे दिन आने वाले हैं
मेरे बेटे
बिजली की तरह कभी मत गिरना
और कभी गिर भी पड़ो
तो दूब की तरह उठ पड़ने के लिए
हमेशा तैयार रहना
कभी अँधेरे में
अगर भूल जाना रास्ता
तो ध्रुवतारे पर नहीं
सिर्फ दूर से आनेवाली
कुत्तों के भूँकने की आवाज पर
भरोसा करना
मेरे बेटे
बुध को उत्तर कभी मत जाना
न इतवार को पच्छिम
और सबसे बड़ी बात मेरे बेटे
कि लिख चुकने के बाद
इन शब्दों को पोंछकर साफ कर देना
ताकि कल जब सूर्योदय हो
तो तुम्हारी पटिया
रोज की तरह
धुली हुई
स्वच्छ
चमकती रहे
– केदारनाथ सिंह
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नितिन डेविड: प्रशिक्षक, सोशलप्रेन्योर
विभिन्न स्कूलों, कॉलेज , यूनिवर्सिटीज में लाइफ स्किल्स, सॉफ्ट स्किल्स की ट्रेनिंग . इकलौते बेटे के नहीं रहने के बाद, सड़क सुरक्षा को लेकर नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना. मुख्यरूप से हेल्मेट की अनिवार्यता एवम् जरूरतमंदों को फ्री हेलमेट वितरण.
सिनर्जी - अ सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट सोसाइटी के माध्यम से सामाजिक गतिविधियों में सक्रीय सहभागिता.
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पुनर्वसु डायरीज़ कला, साहित्य, संस्कृति और अध्यात्म का एक अभिनव मंच है जो जीवन मूल्यों को समर्पित है। इसमें शास्त्र से लोक तक और संयोग से प्रयोग तक सारे रूपों में कला का दर्शन सुलभ है। यहाँ संस्कृति पर चिंतन से अधिक संस्कारों की चिंता है और समाज में उनके प्रसार का विनम्र आग्रह है। साहित्यिक विधाओं की सीमाओं से मुक्त और अध्यात्म से अहोभाव को आमंत्रित करता यह मंच साहित्य, संस्कार, समाज और सरोकार का एक संगम है। जिसके सारे तटों पर केवल और केवल जीवन की झाँकी है।
इसका प्रत्येक प्रस्तोता पहले मनुष्य है, फिर साधक, फिर कलाकार, कलमकार या संस्कृति का पुजारी। इसलिए हरेक की बात एक साधना है, एक पूजा है। इस साधना के सूत्र जीवन की उलझनों को सुलझाने में सहायक हैं और पूजा की अनुभूति जीवन को आनन्द की ओर उन्मुख करने वाली मार्गदर्शिका है।
पुनर्वसु अर्थात् सम्पदा और सम्मान की पुनः प्राप्ति और डायरी अर्थात् सहेजी गई स्मृतियों का संकलन। इसमें बीते कल और आज के मनुष्य की सम्मान के साथ सहेजी हुई स्मृतियों की सम्पदा हैं, आज और आने वाले कल के मनुष्यों के लिए...! इसलिए यह पुनर्वसु डायरीज़ है...!
Punervasu Diaries is dedicated to the values of life depicted through Art, Literature, Culture and Spirituality. There will be concurrence of art forms from scriptures to folk and probable to probed. Not the contemplation of culture but the focus is more on life values, and insist the society to propagate it. Beyond literary limits and within the gratitude of spirituality this platform is a convergence of literature, values, society and affinity; where every facet depicts the beauty of life.
The invitees are humans first, then seeker, then artist, writer or culturist and hence there is much to obtain from their meditated and devoted works of their domain. The meditated work helps in easing the life’s complexity and their devotion guides us towards the spiritual pleasures of life.
Punervasu refers regaining wealth and honour and Diaries the collection of memories – wealth of memories from the past and present for the humans of present and future. That makes PUNERVASU DIARIES.
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