Shri samaysar SS 341 @16-01-26 G-91 गुरुदेवश्री कानजी स्वामी के १९६६-६७ के प्रवचन आधार से
Автор: jinvani sarita pravah (Pradeep Manoria)
Загружено: 2026-01-15
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Описание: जैन संप्रदाय में यहाँ विपरीतता प्रवेश कर गई है कि आत्मा जैसे कर्म बांधे वैसा फल भोगता है .... यहाँ तो कहते हैं कि जड़ कर्म तुमने बांधे ही नहीं तो भोगने का क्या उसमें ???
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