Dr.Hariom Pawar: Kavi Sammelan, Prayagraj
Автор: Bharat Swabhiman
Загружено: 2013-03-27
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इस विडियो में dr. हरिओम पवार ने कवि सम्मेलन के तहत कुछ बाते कही हैं
हमने बहुत बार पतंजलि योगपीठ में कार्यक्रम किये लेकिन आज का ये महोत्सव इतना अद्भुत हैं मैं अपने दिल से एहसास से कहता हूँ की मैं तीस साल लाल किले में गया हूँ कवि सम्मेलन पढने के लिये गया हूँ और आज जिस तरह से ये आज अनुष्ठान समारोह हुआ हैं उस तीस साल की कवि सम्मेलन को मै आज की इस सम्मेलन पर नौछावर करने के तैयार हूँ स्वामी जी केवल गंगा का प्रदूषण दूर नही कर रहे हैं आप हिंदुस्तान की हिंदी कविता के साहित्य में आयें हुए प्रदूषण को भी दूर करने की कोशिश कर रहे हैं हमने ये कोशिश की हम आपके माध्यम से कवियों के माध्यम से आस्था व संस्कार के चैनल के माध्यम से देश तक पहुंचे और हम हिंदी कविता में आयें हुए प्रदुषण को दूर करना चाहते हैं केवल गंगा का प्रदुषण दूर न हो हिंदी साहित्य का प्रदूषण दूर हो जाए इसके लिये आपकी हमे मदद चाहिये और हमे मदद करते हैं उसके लिए हमारे कवि कुल आपका बहुत बहुत से आभारी व्यक्त करते हैं और आपके चरणों में प्रणाम करते हैं इन दिनों स्वामी जी का मुख्य मिशन हैं काले धन पर इसके विषय में मैं कुछ कहना चाहता हूँ की आज हिंदुस्तान की गरीबी का एक मात्र कारण कालाधन हैं हिंदुस्तान की सबसे बड़ी समस्या आतंकवाद नही हैं हिंदुस्तान की सबसे बड़ी समस्या भ्रष्टाचार राजनैतिक नही हैं हिंदुस्तान की सबसे बड़ी समस्या हैं भूख देश के अस्सी करोड़ लोगो का भूखा रहना तीस करोड़ लोगो का भूखा सोना और हजार लोग भूख से मर जाना ये हिंदुस्तान की सबसे बड़ी समस्या हैं आतंकवाद क्या समस्या हुई एक दिन सरदार पटेल जैसा हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री आयेगा 24 घंटे में आतंकवाद से काबू पा लिया जायेगा मुझे कहने में कोई संकोच नही हैं लेकिन भूख पर काबू पाने की स्थिति में नही हैं हम कोई लोग सोचते हैं की कालेधन से भूख का क्या संबंध हैं मैं सिर्फ ये बताना चाहता हूँ की भूख का कालाधन से सीधा संबंध कैसे हैं एक भिखारी जो कटोरा लेकर चौराहे पर भीख मांगता हैं वो भी भारत सरकार को एल्मुनियम का कटोरा खरीदने में टैक्स देता हैं भिखारी भी टैक्स देता हैं और अमीर लोग जो धन विदेशों में जमा कर देते हैं उसपर टैक्स नही देते उसपर विदेशों पर किराया देते हैं आपको आश्चर्य होगा की दुनिया के गरीब देशों के अमीर लोग पैसो को किराये में यूरोप में रखते हैं और यूरोप उसी पैसे को ब्याज पर गरीब देशो को देता हैं पन्द्रह हजार रूपये का एक लाख रूपये किराया लगता हैं स्विजरलैंड के बैंक में रखने पर तो हमारे देश के जिन अमीरों ने पैसे को विदेश में रख दिया उस टैक्स नही दिया सरकार के पास योजनाओं के लिए पैसे कम पड़ गये हम गरीबो के लिये कुछ कर नही सके यह एक बड़ी समस्या हैं
Dr. Hariom Pawar kavi mahasammelan at Prayagraj Allahabad
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