भक्ति काल /निर्गुण काव्य धारा/ सूफी काव्य/प्रेममार्गी धारा
Автор: साहित्य गुंजन
Загружено: 2026-01-11
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निर्गुण भक्ति धारा की प्रेम मार्गी शाखा ईश्वर की उपासना को प्रेम, समर्पण और आंतरिक अनुभूति से जोड़ती है। इस धारा में ईश्वर निराकार होते हुए भी भक्त के हृदय में प्रेम रूप में प्रकट होते हैं। कबीर, दादू जैसे संतों ने प्रेम को ही भक्ति का सर्वोच्च मार्ग माना।
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