श्री ललिता सहस्रनाम | Devotional Trance | Tripurasundari Energy | Female Sanskrit Chant
Автор: Divine Drill
Загружено: 2026-01-07
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Описание:
श्री ललिता त्रिपुरसुंदरी को समर्पित यह Devotional Trance Chant
शक्ति, सौंदर्य और ब्रह्म चेतना का दिव्य अनुभव कराता है।
यह प्रस्तुति ध्यान श्लोक (1–16) और समापन श्लोक (181–183) पर आधारित है।
🎶 Style: Devotional Trance
🎧 Tempo: Medium (95–105 BPM)
🎤 Vocals: Female | Pure Sanskrit Pronunciation
🥁 Instruments: Mridangam, Tabla, Veena, Sitar, Light Electronic Pads
🛕 Vibe: Majestic | Anthemic | Temple Festival Energy
यह वीडियो ध्यान, साधना, मंत्र-जप और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए उपयुक्त है।
हेडफ़ोन के साथ सुनना अधिक प्रभावशाली अनुभव देता है 🙏
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📜 LYRICS: 📿 Lalita Sahasranama
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श्रीमाता, श्रीमहाराज्ञी, श्रीमत्-सिंहासनेश्वरी ।
चिदग्नि-कुण्ड-सम्भूता, देवकार्य-समुद्यता ॥ 1 ॥
उद्यद्भानु-सहस्राभा, चतुर्बाहु-समन्विता ।
रागस्वरूप-पाशाढ्या, क्रोधाकाराङ्कुशोज्ज्वला ॥ 2 ॥
मनोरूपेक्षु-कोदण्डा, पञ्चतन्मात्र-सायका ।
निजारुण प्रभापूर मज्जद्-ब्रह्माण्डमण्डला ॥ 3 ॥
चम्पकाशोक पुन्नाग सौगन्धिक लसत्कचा ।
कुरुविन्द मणिश्रेणी कनत्कोटीर मण्डिता ॥ 4 ॥
अष्टमी चन्द्र विभ्राज दलिकस्थल शोभिता ।
मुखचन्द्र कलङ्काभ मृगनाभि विशेषका ॥ 5 ॥
वदनस्मर माङ्गल्य गृहतोरण चिल्लिका ।
वक्त्रलक्ष्मी परीवाह चलन्मीनाभ लोचना ॥ 6 ॥
नवचम्पक पुष्पाभ नासादण्ड विराजिता ।
ताराकान्ति तिरस्कारि नासाभरण भासुरा ॥ 7 ॥
कदम्ब मञ्जरीकॢप्त कर्णपूर मनोहरा ।
ताटङ्क युगलीभूत तपनोडुप मण्डला ॥ 8 ॥
पद्मराग शिलादर्श परिभावि कपोलभूः ।
नवविद्रुम बिम्बश्रीः न्यक्कारि रदनच्छदा ॥ 9 ॥
शुद्ध विद्याङ्कुराकार द्विजपङ्क्ति द्वयोज्ज्वला ।
कर्पूरवीटि कामोद समाकर्षद्दिगन्तरा ॥ 10 ॥
निजसल्लाप माधुर्य विनिर्भत्सित कच्छपी ।
मन्दस्मित प्रभापूर मज्जत्-कामेश मानसा ॥ 11 ॥
अनाकलित सादृश्य चुबुक श्री विराजिता ।
कामेशबद्ध माङ्गल्य सूत्रशोभित कन्थरा ॥ 12 ॥
कनकाङ्गद केयूर कमनीय भुजान्विता ।
रत्नग्रैवेय चिन्ताक लोलमुक्ता फलान्विता ॥ 13 ॥
कामेश्वर प्रेमरत्न मणि प्रतिपणस्तनी ।
नाभ्यालवाल रोमालि लताफल कुचद्वयी ॥ 14 ॥
लक्ष्यरोमलता धारता समुन्नेय मध्यमा ।
स्तनभार दलन्-मध्य पट्टबन्ध वलित्रया ॥ 15 ॥
अरुणारुण कौसुम्भ वस्त्र भास्वत्-कटीतटी ।
रत्नकिङ्किणि कारम्य रशनादाम भूषिता ॥ 16 ॥
अभ्यासाति शयज्ञाता, षडध्वातीत रूपिणी ।
अव्याज करुणामूर्ति, रज्ञानध्वान्त दीपिका ॥ 181 ॥
आबालगोप विदिता, सर्वानुल्लङ्घ्य शासना ।
श्री चक्रराजनिलया, श्रीमत्त्रिपुर सुन्दरी ॥ 182 ॥
श्री शिवा, शिवशक्त्यैक्य रूपिणी, ललिताम्बिका ।
एवं श्रीललितादेव्या नाम्नां साहस्रकं जगुः ॥ 183 ॥
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🎶 Music generated using Suno AI
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