राजस्थान दिवस || Rajasthan || INDA SAHAB || Rajputana
Автор: The Kshatriya Legacy
Загружено: 2023-03-29
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मरुधरा को विधाता से केवल दुर्भाग्य ही मिला है।बसने को बंजर जमीन,पीने को चौमासे का पानी,खाने को दो फांक बाजरे की सम्पत्ति के नाम पर अरावली के कंकड़ पत्थर।त्यौहार के नाम पर अकाल और मनोरंजन के लिए युद्घ.
दुर्भाग्य की ब्याहता ये धरती कभी अपने दुर्भाग्य पर नही रोई। यहां के लोगो ने इसे ही अपना सौभाग्य समझकर इन कंकड़ पत्थरो के लिए आगे आकर शीश दिएहै।जिसके कारण कभी शेरशाह सूरी गिरी सुमेल युद्ध मे कहा था कि मैं मुठ्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्थान की बादशाहत खो देता.
राजस्थान की भूमि में ऐसा कोई फूल नहीं उगा जो राष्ट्रीय वीरता और त्याग की सुगन्ध से भरकर न झूमा हो। वायु का एक भी झोंका ऐसा नहीं उठा जिसकी झंझा के साथ युद्ध देवी के चरणों में साहसी युवकों का प्रस्थान न हुआ हो।मिट्टी का ऐसा कोई कण न हुआ जिसने रक्त का भोग न लिया हो।राजपूतो का ऐसा कुटुंब न हुआ जिसमें कोई सती और झुंझार न की पूजा ना होती हो।
जेठ की दुपहरी ये मरुधरा तपकर प्रकृति की तपस्या करती है और वरदान में बारिश लाकर खुद प्यासी रहती है, पर देश को पानी पिलाती है.
महाकवि रामधारी सिंह दिनकर ने कहा था की जब भी मैं राजस्थान की धरती पर पांव रखता हूँ तो मेरे पैर कांपने लगते है कि कही मेरे पांव के नीचे किसी वीर की समाधी या किसी वीरांगना का थान ना आ जाए।यहां अपने इष्टों की आराधना गौरवमयी जीवन नही अपितु गौरवमयी मृत्यु के लिए की गई.
बिरले लोगो की बिरली ही गौहर गाथाएं होती है।यहां के योद्धा इतने भोले रहे है, कि रणभूमि में शीश भूलकर धड़ से युद्ध करके गौहर दिखाते थे।वीरता और पराक्रम के ऐसे बिरले उदाहरण सम्पूर्ण विश्व मे कही और नही.
तभी तो कवि ने कहा है कि....
बौले सुरपत बैण यूँ ,
सुरपुर राखण सान |
सुरग बसाऊं आज सूं,
नान्हों सो रजथान ||
[सुर-पति इंद्र कहता है कि स्वर्ग की शान रखने के लिए आज से मैं यहाँ भी एक छोटा सा राजस्थान बसाऊंगा | ताकि लोग स्वर्ग को भी वीर भूमि समझे ]
प्रताप,हम्मीर,कुम्भा,वीरमदेव,मीरा,करमा,पन्ना पद्मिनी की जगविख्यात कहानियां यहां लिखने की आवश्यकता नही है।बहुत कही जा चुकी बहुत सुनी जा चुकी.
मुझे हमेशा इस बात का हमेशा अभिमान रहा है कि मैं उस धरती में पैदा हुआ जिसके लिए कहा जाता है....
"मूँड़ कटे,रुंड लडे, इतिहास हमे बताता है।
खुद्दारी से जीना,केवल राजस्थान सिखाता है।।
गर्व करिये अपने राजस्थानी होने पर अपने भारतीय होने पर,
जय जय राजस्थान
✍ लोकेन्द्र सिंह
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