गीता अध्याय 1 श्लोक 43 | कर्म, कुल धर्म और पाप का गहरा अर्थ | Full Explanation by Gita Gyan
Автор: GITA GYAN
Загружено: 2026-02-19
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इस वीडियो में हम भगवद गीता के प्रथम अध्याय के श्लोक 43 का सरल और गहराई से समझने योग्य अर्थ जानेंगे।
इस श्लोक में अर्जुन कुल धर्म के नाश और उसके परिणामों के बारे में चिंता व्यक्त करते हैं।
यहाँ बताया गया है कि जब परिवार और समाज के धर्म का नाश होता है, तो उसके क्या गंभीर परिणाम हो सकते हैं और मनुष्य किस प्रकार पाप का भागी बनता है।
अगर आप गीता के प्रत्येक श्लोक को आसान भाषा में समझना चाहते हैं, तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें।
🙏 जय श्री कृष्ण 🙏
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