Shri Hit Chaturasiju Pad Sankhya 1-6
Автор: HarivanshDulari_CharanSharan
Загружено: 2026-02-02
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Radhavallabh Shri Harivansh 🙏
श्री हित चतुरासीजी के पद संख्या 1 से 6 प्रेम, भक्ति और समर्पण की दिव्य अभिव्यक्ति हैं। इन पदों के माध्यम से व्रजधाम वृंदावन की रसमयी भक्ति, श्रीजी की करुणा तथा निस्वार्थ प्रेम का मधुर अनुभव होता है। पूज्य प्रेमानंद जी महाराज के पावन मार्गदर्शन में ये पद साधक के हृदय को श्रीजी के चरणों से जोड़ देते हैं। 🌸
Pad Sankhya 01
जोई-जोई प्यारौ करै सोई मोहि भावै,
भावै मोहि जोई सोई-सोई करें प्यारे
मोकों तौ भावती ठौर प्यारे के नैनन में,
प्यारौ भयौ चाहै मेरे नैंनन के तारे ॥
मेरे तन मन प्राण हूँ ते प्रीतम प्रिय,
अपने कोटिक प्राण प्रीतम मोसों हारे।जै श्रीहित हरिवंश हंस-हंसिनी सॉवल - गौर,
कही कौन करै जल-तरंगनि न्यारे ॥
Pad Sankhya 02
प्यारे बोली भामिनी आजु नीकी जामिनी,
भेंट नवीन मेघ सौं दामिनी ॥
मोहन रसिक-राइरी माई, तासौं जु–
मान करे,ऐसी कौन कामिनी ।जै श्रीहित हरिवंश श्रवण सुनत प्यारी,
राधिकारमण सौं मिली गज-गामिनी ॥
Pad Sankhya 03
प्रात समय दोऊ रस लंपट,
सुरत- जुद्ध जय जुत अति फूल ।श्रम वारिज घनविन्दु वदन पर,
भूषण अंगहि अंग विकूल ॥कछु रह्यौ तिलक सिथिल अलकावलि,
वदन कमल मानौं अलि भूल ।जै श्रीहित हरिवंश मदन-रंग रँगि रहे,
नैंन-बैंन कटि सिथिल दुकूल ||
Pad Sankhya 04
आजु तौ जुवति तेरी, वदन आनन्द भय,
पिय के संगम के सूचत सुख चैन।आलस वलित बोल, सुरंग रंगे कपोल,
विथकित अरुण उनींदे दोऊ मैंन ॥
रुचिर तिलक लेश किरत कुसुम केश,
सिर सीमंत भूषित मानौं तैं न।
करुणाकर उदार रखत कछु न सार,
दसन-वसन लागत जब न ॥
काहे कौं दुरत भीरु, पलटे प्रीतम चीर,
बस किये श्याम सिखै सत मैंन ।गलित उरसि माल सिथिल किंकिनी जाल,
जै श्रीहित हरिवंश लता-गृह सैंन ॥
Pad Sankhya 05
आजु प्रभात लता-मंदिर में,
सुख बरसत अति हरषि युगल वर।गौर-श्याम अभिराम रंगभरे,
लटकि-लटकि पग धरत अवनि पर ॥कुच-कुमकुम रंजित मालावलि,
सुरत नाथ श्रीश्याम धाम धर ।
प्रिया प्रेम के अंक अलंकृत,
चित्रित चतुर शिरोमनि निजकर ॥
दम्पति अति अनुराग मुदित कल,
गान करत मन हरत परस्पर ।
जै श्रीहित हरिवंश प्रशंस-परायन,
गायन अलि सुर देत मधुर तर ॥
Pad Sankhya 06
कौन चतुर जुवती प्रिया,
जाहि मिलत लाल चोर है रैन ।दुरवत क्यौंऽव दुरै सुनि प्यारे,
रंग में गहिले चैंन में नैन ॥
उर नख चंद्र विराने, पट अटपटे से बैन।
जैश्रीहित हरिवंश रसिक राधापति, प्रमथित मैन।
Jai Jai Shri Hit Harivansh 🙏
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