क्या योगी सच में दिव्य श्रवण और दर्शन प्राप्त करता है? | विभूति पाद 23–33
Автор: Sudhi Gyan Sadhana
Загружено: 2026-02-12
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योग दर्शन के तृतीय अध्याय विभूति पाद के सूत्र 23 से 33 तक की इस कक्षा में संयम के माध्यम से उत्पन्न होने वाली विभिन्न सिद्धियों का दार्शनिक एवं संतुलित विवेचन किया गया है।
महर्षि पतंजलि इन सूत्रों में बताते हैं —
🔹 मैत्री, करुणा और मुदिता में संयम से उत्पन्न बल
🔹 हस्तिबलादि शक्ति का प्रतीकात्मक अर्थ
🔹 सूक्ष्म, दूर और आच्छन्न वस्तुओं का ज्ञान
🔹 सूर्य और चन्द्र संयम का वास्तविक आशय
🔹 नाभिचक्र, कण्ठकूप और कूर्मनाड़ी का गूढ़ महत्व
🔹 मूर्धज्योति और सिद्धदर्शन
🔹 प्रातिभ ज्ञान की प्रकृति
इस वीडियो में सिद्धियों को चमत्कार के रूप में नहीं, बल्कि चेतना की परिपक्वता और सूक्ष्म निरीक्षण की क्षमता के रूप में समझाया गया है।
यह चर्चा साधकों को यह भी स्मरण कराती है कि विभूतियाँ लक्ष्य नहीं हैं —
विवेक और वैराग्य ही आगे का मार्ग खोलते हैं।
यदि आप योग दर्शन का गंभीर अध्ययन कर रहे हैं या साधना की गहराई को समझना चाहते हैं, तो यह कक्षा आपके लिए अत्यंत उपयोगी है।
🌿 संयम को समझें
🌿 सिद्धि से सावधान रहें
🌿 विवेक को जागृत करें
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विभूति पाद
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