मरने के बाद भीड़ क्यों? जीते जी साथ क्यों नहीं? मानव धर्म: जीते जी सेवा
Автор: Jaydeo Domaji Dhande
Загружено: 2026-02-12
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नमस्कारजी 🙏🙏
आज का यह वीडियो हमारे समाज की उस कड़वी सच्चाई पर आधारित है, जहाँ हम इंसान के मरने के बाद तो घंटों समय निकालते हैं, लेकिन उसके जीवित रहते दो पल साथ नहीं बैठते। महानत्यागी बाबा जुमदेवजी के "मानव धर्म" और "निष्काम कर्मयोग" के सिद्धांतों के माध्यम से, हम जानेंगे कि असली मुक्ति और सेवा क्या है।
इस वीडियो में आप जानेंगे:
क्यों 'राम नाम सत्य है' से श्रेष्ठ 'मरे या जिए भगवत नाम पर' का संकल्प है?
निष्काम कर्मयोग का असली अर्थ और माता-पिता की सेवा का महत्व।
श्मशान की भीड़ और आज के दिखावे के बाजार का असली चेहरा।
बाबा जुमदेवजी के बताए मार्ग पर चलकर खुद को कैसे बदलें?
हमें उम्मीद है कि यह वीडियो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यदि आपको यह संदेश सही लगा, तो इसे अन्य सेवक भाइयों और समाज के साथ जरूर साझा करें।
"मरे या जिए भगवत नाम पर!"
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क्या आप सहमत हैं कि मरने के बाद फूलों की माला से बेहतर जीते-जी एक प्यारा शब्द है? अपनी राय 'परमात्मा एक' के साथ नीचे लिखें।"
Mob: 9823244666
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