दस्तावेज | Shivmurti Interview by Krishna Samiddha | Episode5 | Dastavez | Life Raag | Hindi Sahitya
Автор: Life Raag
Загружено: 2025-08-02
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Shivmurti Interview by Krishna Samiddha
Interview date - 17/10/2018
📖 दस्तावेज़ 5 | Shivmurti से ख़ास बातचीत | हिंदी साहित्य में कथा, समय और समाज का दस्तावेज़
Episode 5 में मिलिए हिंदी के प्रख्यात कथाकार शिवमूर्ति से, जिनकी कहानियाँ खेत, खलिहान, जाति, वर्ग और स्त्री-जीवन के संघर्षों की जीवंत आवाज़ हैं। दस्तावेज़ सिर्फ़ एक साक्षात्कार श्रृंखला नहीं, बल्कि हमारे समय की साहित्यिक यात्रा है। इस एपिसोड में कृष्ण समिद्ध के साथ बातचीत में शिवमूर्ति खुलकर बात करते हैं अपने लेखन, संवेदना, ग्रामीण यथार्थ और कथा की ताक़त पर।
🎙️ इस एपिसोड में:
🔹 शिवमूर्ति की चर्चित कहानियाँ और उपन्यास
🔹 कथा लेखन की प्रक्रिया, चुनौतियाँ और सामाजिक प्रतिबद्धता
🔹 ग्रामीण भारत का यथार्थ और हिंदी कथा परंपरा
🔹 समकालीन हिंदी साहित्य पर सधा हुआ दृष्टिकोण
Dastavez is a tribute to those voices that continue to shape Hindi literature with courage, compassion, and conviction.
📌 यदि आप Hindi Kahani, Samkaleen Sahitya, और Hindi writers interviews में रुचि रखते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है।
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📚 शिवमूर्ति (जन्म: 1950) - जीवन, साहित्य और समाज की आवाज़
शिवमूर्ति हिंदी साहित्य की वह संवेदनशील आवाज़, जिसने ग्रामीण भारत की ज़िंदगी, संघर्ष, और बदलाव को कहानियों में सजीव किया। उनकी कहानियाँ किसी दस्तावेज़ की तरह समय, समाज और सत्ता के यथार्थ को उजागर करती हैं। शिवमूर्ति समकालीन Hindi literature के एक अनूठे कथाकार हैं, जिनकी कहानियाँ ग्रामीण भारत की धड़कन, संघर्ष और सच्चाइयों को अद्वितीय गहराई के साथ चित्रित करती हैं। उनका लेखन न केवल साहित्यिक, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी कहानियाँ हिंदी कथा-साहित्य की विरल उपलब्धियाँ हैं, जो जाति, वर्ग, लैंगिकता और सत्ता के यथार्थ को अभिव्यक्त करती हैं।
कथा-लेखन के क्षेत्र में प्रारम्भ से ही प्रभावी उपस्थिति दर्ज करानेवाले शिवमूर्ति की कहानियों में निहित नाट्य सम्भावनाओं ने दृश्य-माध्यमों को भी प्रभावित किया। कसाईबाड़ा, तिरिया चरित्तर, भरतनाट्यम तथा सिरी उपमाजोग पर फ़िल्में बनीं, जबकि ‘तर्पण’ उपन्यास पर एक फ़िल्म प्रस्तावित है। तिरिया चरित्तर, कसाईबाड़ा और भरतनाट्यम के हज़ारों मंचन हुए। अनेक देशी-विदेशी भाषाओं में रचनाओं के अनुवाद हुए। कुछ कहानियों का बांग्ला, पंजाबी, उर्दू, उड़िया, कन्नड़ आदि भाषाओं में अनुवाद हुआ है। उपन्यास ‘त्रिशूल’ उर्दू एवं पंजाबी में, ‘तर्पण’ जर्मन में और ‘आख़िरी छलाँग’ कन्नड़ में अनूदित है। साहित्यिक पत्रिकाओं यथा - मंच, लमही, संवेद, नया ज्ञानोदय, समावर्तन तथा इंडिया इनसाइड ने इनके साहित्यिक अवदान पर विशेषांक प्रकाशित किए।
पहली कहानी बीकानेर से प्रकाशित वातायान में ‘पानफूल’ शीर्षक से 1968 में प्रकाशित हो गई थी। 1976 में दिनमान द्वारा आयोजित अपढ़ संवाद प्रतिगिता में प्रथम पुरस्कार पाने से पुनः लेखन की ओर झुकाव हुआ। जनवरी 80 में धर्मयुग में ‘कसाईबाड़ा’ कहानी प्रकाशित हुई। 1991 में राधाकृष्ण प्रकाशन से ‘केशर-कस्तूरी’ कहानी-संग्रह और 1995 एवं 2004 में राजकमल प्रकाशन से ‘त्रिशूल’ और ‘तर्पण’ उपन्यास प्रकाशित हुए। 2008 में प्रकाशित तीसरा उपन्यास ‘आख़िरी छलाँग’ विशेष रूप से चर्चित रहा।
प्रकाशित पुस्तकें :
कहानी-संग्रह : केसर कस्तूरी, कुच्ची का क़ानून।
उपन्यास : त्रिशूल, तर्पण, आख़िरी छलाँग, अगम बहे दरियाव।
नाटक : कसाईबाड़ा, तिरिया चरित्तर, भरतनाट्यम।
सृजनात्मक गद्य : सृजन का रसायन।
साक्षात्कार : मेरे साक्षात्कार (सं. : सुशील सिद्धार्थ)।
प्रमुख सम्मान :
तिरिया चरित्तर कहानी 'हंस’ पत्रिका द्वारा सर्वश्रेष्ठ कहानी के रूप में पुरस्कृत।
‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान’,
'आनन्दसागर स्मृति कथाक्रम सम्मान’,
'लमही सम्मान’,
'सृजन सम्मान’ एवं
'अवध भारती सम्मान’।
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