श्री स्वस्थानी व्रत कथा को अन्तिममा गरिने प्रार्थना
Автор: Deeplata Upadhyaya
Загружено: 2020-02-16
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।। श्री स्वस्थानी माता को जय ।।
श्री स्वस्थानी व्रत कथा को अन्तिममा गरिने प्रार्थना
अब कथा सुन्ने सबै श्रोताहरुले नित्य कथा सुनिसकेपछि चन्दन, अक्षता, फूल लिएर उभिई हात जोर्नू अनि वक्ता पण्डितले तल लेखिएका श्लोकहरू पढ्नू -
उपनयतु मङ्गलं वः सकल-जगन्-मङ्गलालयः श्रीमान्।
दिनकर-किरण-निबोधित-नव-नलिन-दल-निभेक्षणः कृष्णः।।
काले वर्षतु पर्जन्यः पृथिवी शस्य-शालिनी।
देशोऽयं क्षोभ-रहितो ब्राह्मणाः सन्तु निर्भयाः।।
अपुत्राः पुत्रिणः सन्तु पुत्रिणः सन्तु पौत्रिणः।
निर्धनाः सधनाः सन्तु जीवन्तु शरदां शतम्।।
तत्रैव गङ्गा यमुना च तत्र, गोदावरी सिन्धु सरस्वती च।
तीर्थानि सर्वाणि वसन्ति तत्र, यत्राऽच्युतोदार-कथा-प्रसङ्गः।।
या कुन्देन्दु-तुषार-हार-धवला या शुभ्र-वस्त्रावृता
या वीणा-वरदण्ड-मण्डित-करा या श्वेत-पद्मासना।
या ब्रह्माच्युत-शङ्कर-प्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष-जाड्यापहा।।
कायेन वाचा मनसेन्द्रियैर्वा, बुद्ध्यात्मना वा प्रकृतिस्वभावात्।
करोमि यद्यत् सकलं परस्मै, नारायणायेति समर्पये तत्।।
।। श्रीस्वस्थानी-देव्यार्पणमस्तु।।
।। यति भनिसकेर कथा सुन्ने जति समस्त श्रोताहरूले पुस्तकको बासामाथि पुष्पाञ्जलि चढाई पुस्तकलाई ढोग गर्नू र आफाफ्ना मनको इच्छित वरदान माँग्नू।।
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