अगर प्रभु आ जाएँ | इंसानियत पर सवाल उठाता हृदयस्पर्शी भक्ति गीत | Devotional Song
Автор: Jeevan Marg
Загружено: 2026-01-17
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Описание:
अगर आज प्रभु स्वयं धरती पर आ जाएँ,
तो क्या वे हमारे कर्म देखकर मुस्कुराएँगे
या हमारी लालच, हिंसा और दिखावे से
उनकी आँखें भर आएँगी?
यह गीत केवल भक्ति नहीं,
यह आज के समाज के लिए आत्ममंथन है।
राम के वंशज कहलाकर
जब व्यवहार रावण जैसा हो जाए,
तो प्रभु से नज़र मिलाना भी कठिन हो जाता है।
यह गीत पूछता है —
धर्म क्या केवल नाम है?
या आचरण भी होना चाहिए?
अगर यह गीत आपके मन को छू जाए,
तो इसे like, share करें
और एक पल के लिए खुद से सवाल ज़रूर पूछें।
🙏 कर्म में राम बस जाएँ, तभी प्रभु मुस्कुरा के जाएँ।
🎵 Lyrics
प्रभु अगर तुझसे मिलने आएँ,
कहीं नाराज़ होके न चले जाएँ।
देख तेरी तृष्णा, तेरा लालच,
प्रभु की आँखें भर जाएँ।
देख के संसार की ये हालत,
कह दें—ऐसा मानव न बनाया।
राम के वंशज कहलाते हैं,
पर रावण जैसा आचरण अपनाया।
मंदिर में दीप जलाते हैं,
मन में अंधियारा बसाए हुए।
होठों पर राम का नाम मगर,
कर्मों से मर्यादा गिराए हुए।
धर्म को ओढ़ा, कर्म न बदले,
सच को झूठ से तौला है।
जिस धरती को माँ कहा था,
उसी को लहू से धोया है।
प्रभु अगर तुझसे मिलने आएँ,
तो नज़रें हम झुका जाएँ।
भाई-भाई की इस दुश्मनी में,
प्रभु की साँसें थम जाएँ।
न्याय बिके, सत्य झुका हो,
भूखा रोता बचपन है।
जो निर्बल है वो मिटता जाए,
बलवानों का ही शासन है।
नारी पूजी शास्त्रों में,
जीवन में अपमान सहे।
रामराज्य की बातें करते,
सीता को न सम्मान मिले।
कहें प्रभु—मैंने प्रेम दिया था,
तुमने द्वेष क्यों अपना लिया?
मानवता का दीप जलाया,
तुमने क्यों अंधेरा भर लिया?
प्रभु अगर तुझसे मिलने आएँ,
कुछ प्रश्न भी कर जाएँ।
मेरे नाम पे लड़कर बताओ,
तुमने क्या पाया, क्या गँवाया?
अब भी वक्त है, संभल जा मानव,
आज भी राम बुलाएँगे।
कर्म में राम बस जाएँ यदि,
प्रभु मुस्कुरा के जाएँगे।
प्रभु अगर तुझसे मिलने आएँ…
इस बार मुस्कुरा के जाएँ। 🙏
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