श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी | मधुर भजन | मन को शांति और सुख देने वाला कीर्तन
Автор: Sunita Bhakti Dhara सुनीता भक्ति धारा
Загружено: 2026-03-01
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हरे कृष्ण गोविंद हरे मुरारी” एक अत्यंत मधुर और भावपूर्ण भजन है जो भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और करुणा का अनुभव कराता है।
इस दिव्य कीर्तन को सुनकर मन शांत होता है, नकारात्मकता दूर होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस भजन को प्रतिदिन प्रातः या सायं सुनें और श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन हो जाएँ।
जय श्रीकृष्ण 🙏
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श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
पितु मात स्वामी, सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
बंदी गृह के, तुम अवतारी, कहीं जन्मे, कही पले मुरारी।
किसी के जाये, किसी के कहाये, है अद्भुत, हर बात तिहारी॥
है अद्भुत, हर बात तिहारी…
गोकुल में चमके, मथुरा के तारे… हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
पितु मात स्वामी, सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
अधर पे बंशी, ह्रदय में राधे, बट गए दोनों में, आधे-आधे
हे राधा नागर, हे भक्त वत्सल,
सदैव भक्तों के, काम साधे। सदैव भक्तों के, काम साधे॥
वहीं गए, जहां गए पुकारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
गीता में उपदेश सुनाया, धर्म युद्ध को धर्म बताया।
कर्म तू कर मत रख फल की इच्छा, यह सन्देश तुम्ही से पाया।
अमर है गीता के बोल सारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
पितु मात स्वामी सखा हमारे, हे नाथ नारायण वासुदेवा॥
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बंधू सखा त्वमेव।
त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव, त्वमेव सर्वं मम देव देवा॥
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