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Top 10 Rathore Warriors ।। राठौड़ वंश में जन्मे Top 10 योद्धा ।। Times of Rajasthan

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Rajput History

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राठौड़ वंश का इतिहास

राठौड़ों का इतिहास

Rathore of Jodhpur

Rathore of Marwar

जोधपुर के राठौड़

मारवाड़ के राठौड़ वंश का इतिहास

बीकानेर के राठौड़ वंश का इतिहास

Rao Siha ji History

राव सीहाजी का इतिहास

राव धूहड़ राठौड़ का इतिहास

Rathore of Kishangarh

किशनगढ़ के राठौड़

Автор: Times Of Rajasthan

Загружено: 2021-04-07

Просмотров: 64815

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जिस प्रकार चित्रकूट का नाम कालान्तर से चित्तौड़ हो गया उसी प्रकार राष्ट्रकूट शब्द राठौड़ हो गया।

मारवाड़ के इन राठौड़ वीरों ने सैंकड़ो वर्षो तक म्लेच्छ शक्ति से लगातार संघर्ष करते हुए भारत की सुरक्षा में अमूल्य योगदान दिया था। महाराष्ट्र और सम्पूर्ण दक्षिण भारत पर राठौडों का शासन था बाद में यहां से चलकर राठौड़ कन्नौज पहुंचे और वहां शासन करते रहे और इस प्रकार कन्नौज के राठौड़ राजाओं के वंशज राव सीहाजी लगभग 1250ई. में मारवाड़ आए थे। नैणसी की ख्यात के अनुसार राव सीहाजी कन्नौज से तीर्थयात्रा पर द्वारका जा रहे थे। मार्ग में उन्होंने पुष्कर तीर्थ के दर्शन भी किए। वहीं पुष्कर में भीनमाल के ब्राह्मण ठहरे हुए थे। उन ब्राह्मणों ने राव सीहा और उनके राठौड़ वीर योद्धाओं को देखा और उनसे प्रभावित होकर कहा कि भीनमाल पर मुल्तान के मुसलमानों द्वारा अत्याचार होते हैं जिनसे उनको मुक्ति दिलाई जाए।

बस इतनी बात सुन राव सीहाजी ने तुरंत ही भीनमाल पर चढ़ाई कर दी और, वहां के मुस्लिम शत्रुओं को मार भगाया और भीनमाल को जीतकर ब्राह्मणों को दान में दे दिया।

इसके बाद राव सीहाजी ने पाली के ब्राह्मणों की मेर और मीणाओं से स्थाई रक्षा की थी।

राव सीहाजी ने अनेकों बार मुगलों से युद्ध कर हिन्दू गौरव को बढ़ाया था। आज भी मारवाड़ और सम्पूर्ण राजस्थान में उनकी वीरता प्रसिद्ध है।

राव धूहड़ (ध्रुवभट्ट राठौड़)

राव आस्थान के राज्य के उत्तराधिकारी उनके पुत्र राव धूहड़ हुए। राव धूहड़ राठौड़ अलाउद्दीन खिलजी की सिवाणा के रावल सातलदेव चौहान पर किए गए आक्रमण के दौरान सातलदेव चौहान की ओर से युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की। इस युद्ध में राव धूहड़ ने अलाउद्दीन खिलजी की सेना पर भयंकर तीव्र प्रहार किए थे जिससे अलाउद्दीन खिलजी को एक बार तो पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा था, परन्तु शत्रुओं की संख्या ज्यादा होने की वजह से इन्होंने युद्ध करते हुए वीरगति प्राप्त की‌।


वीर कांधल जी राठौड़

मारवाड़ के राव धूहड़ के भाई जोपसा राठौड़ थे और जोपसा राठौड़ के पुत्र मुलु राठौड़ थे। मुलु राठौड़ के पुत्र वीर कांधल जी राठौड़ हुए।

कांधल राठौड़ ने जालौर के धर्मयुद्ध के दौरान एक के बाद एक 40 तलवारें तोड़ी थी। जब एक तलवार टूट जाती तो दूसरी तलवार लेकर कांधल राठौड़ फिर से युद्ध करने लग जाते। कांधल राठौड़ अपने जालौर के रावल कान्हड़देव चौहान के अलावा किसी के आगे सर नहीं झुकाते थे। जब अलाउद्दीन खिलजी ने गुजरात के सोमनाथ मन्दिर को तोड़ा और सोमनाथ महादेव की मूर्ति बैलगाड़ी पर रखकर जालौर सीमा में आया तो कांधल राठौड़ ने यह प्रण किया था कि वह सोमनाथ महादेव को शत्रुओं से मुक्त नहीं करवा देगा तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे और कांधल राठौड़ ने ऐसा किया भी। उन्होंने अपने प्रण के अनुसार सोमनाथ महादेव की मूर्ति को मुक्त ही नहीं करवाया बल्कि रावल कन्हड़देव चौहान की सहायता से वापस मूर्ति को सोमनाथ मन्दिर वापस भी भिजवाया।

1314ई. के जालौर के जौहर व शाके के युद्ध में कांधल राठौड़ ने अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति सीहा मलिक को मारा और स्वयं ने अलाउद्दीन की सेना का खूब संहार किया और अंत में युद्ध मैदान में हिंदुत्व व भारत की रक्षार्थ अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे।

रावल मल्लीनाथ राठौड़ और कुंवर जगमाल राठौड़

राव सलखा राठौड़ के बड़े पुत्र रावल मल्लीनाथ राठौड़ थे‌। रावल मल्लीनाथ ने मुसलमानों से पांच युद्ध जीते थे।

इसके अलावा रावल मल्लीनाथ के बारे में कहा गया है -

तेराह तुंगा भांजिया, माले सलखाणी।

अर्थात् - सलखा राठौड़ के पुपा रावल मल्लीनाथ ने 13 सेनाओं को हराया था। इसके अलावा नेमजीर खां नाम का एक मुस्लिम योद्धा रावल मल्लीनाथ से डर कर भागा था।

कुंवर जगमाल राठौड़ - रावल मल्लीनाथ के पुत्र कुंवर जगमाल राठौड़ थे। एक बार गुजरात का एक मुसलमान सेनापति महेवा के सिणली तालाब पर तीज व्रत करती हुई कुमारी कन्याओं का अपहरण कर ले गया। तब कुंवर जगमाल कन्याओं को छुड़ाने अपनी कुछ सेना के साथ गुजरात के लिए निकल पड़े। वहां जगमाल राठौड़ ने सेनापति की पुत्री गिंदोली का अपहरण कर लिया और अपने साथ ले गए‌। जगमाल राठौड़ के पीछे-पीछे मुस्लिम सेनापति और गुजरात की सेना महेवा पर आ गई और आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण का जगमाल राठौड़ ने मुंहतोड़ जवाब दिया और ऐसा युद्ध किया की मुस्लिम सेना को तीतर-बीतर कर दिया। इस युद्ध के बारे में एक दोहा प्रचलित है-

पग पग नेजा पाडिया, पग पग पाडी ढाल
बीबी पूछे खान ने, जंग केता जगमाल

अर्थात् - युद्ध भूमि पर भाले और डालें पग-पग पर बिखरी पड़ी हैं और मुस्लिम सेनापति की बीवी युद्ध देख रही थी और उसको पूरे युद्ध मैदान में हर तरफ केवल जगमाल राठौड़ ही दिखाई दे रहा था। तब खान को उसकी बीबी पूछती है कि दुनिया में आखिर कितने जगमाल है।

राजसिंह राठौड़, आलणियावास

आलणियावास के ठाकुर राजसिंह राठौड़ ने 19 अगस्त 1679 में पुष्कर तीर्थ के मंदिरों की रक्षार्थ औरंगजेब के फौजदार तहव्वर खां का तीन दिन तक अपने हजारों योद्धाओं के साथ बड़ी वीरता से सामना किया था और युद्ध के अंत में अपने साथियों के साथ सरोवर के ब्रहाघाट पर अपना क्षत्रियोचित बलिदान दिया था।

विजयमल राठौड़ (बाथ पंचायण) - विजयमल राठौड़ मारवाड़ के राव चूण्डाजी के छोटे कुंवर थे। इन्होंने जालौर के राजा बीसलदेव चौहान को भुजाओं (बाथ) में पकड़ कर मार डाला था। इसलिए इनको बाथ पंचायण यानि Tiger Hug कहा गया।

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