मिट्टी की महक वाला मेरा गांव"(1960s गाने – सादगी, भावुकता, मधुरता)
Автор: T music Hindi
Загружено: 2026-02-27
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मिट्टी की महक वाला मेरा
गांव"(1960s गाने– सादगी,
भावुकता, मधुरता)
गीत के लिरिक्स
🎶 मुखड़ा:
मिट्टी की महक वाला मेरा गांव रे,
सपनों से भी प्यारा मेरा गांव रे।
पीपल की छांव में बीते बचपन के दिन,
यादों का उजियारा मेरा गांव रे।
मिट्टी की महक वाला मेरा गांव रे...
🎶 अंतरा 1:
सुबह-सुबह जब सूरज हौले से मुस्काए,
कोयल की कू-कू मन को लुभाए।
नदी किनारे गाए चरवाहा गीत,
बांसुरी की धुन में रब दिख जाए।
खेतों में लहराए सोने सी फसल,
मेहनत की खुशबू हर दिल में बसल।
चूल्हे की रोटी, गुड़ की मिठास,
मां के हाथों में सारा आकाश।
(दोहराव)
मिट्टी की महक वाला मेरा गांव रे...
🎶 अंतरा 2:
पगडंडी पर चलते सपनों के काफिले,
हंसते-गाते अपने सारे सिलसिले।
बरगद तले बैठी चौपाल सजे,
सच्चे दिलों के भोले फसाने मिले।
सावन आए तो झूले पड़ जाएं,
कजरी की तानें गगन छू जाएं।
राधा सी छोरी, श्याम सा छोरा,
सादगी में सारा जहां समाए।
(दोहराव)
सपनों से भी प्यारा मेरा गांव रे...
🎶 अंतरा 3:
दीवाली में जगमग हर एक द्वार,
होली में रंगों की बौछार।
ढोलक की थाप पे नाचे सारा गांव,
खुशियों से भर जाए हर इक संसार।
रात में जब चांदनी उतर आए,
तारों की बारात संग लाए।
दादी की बातें, किस्से पुराने,
नींदों में मीठे सपने सजाए।
(दोहराव)
पीपल की छांव में बीते बचपन के दिन...
🎶 अंतरा 4 (भावुक):
अब शहरों में रहकर याद आए,
वो मिट्टी जो दिल को बुलाए।
ना ऊंची इमारत, ना चकाचौंध,
बस अपना सा चेहरा नजर आए।
थका हुआ जब मन घबराए,
गांव की राह खुद बुलाए।
जनम-जनम का है ये नाता,
रूह भी वहीं सुकून पाए।
(धीमा दोहराव – अंत)
मिट्टी की महक वाला मेरा गांव रे…
सपनों से भी प्यारा मेरा गांव रे…
यादों का उजियारा मेरा गांव रे…
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